Haridwar:- अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया विवाद, एसआईटी पूछताछ के दौरान भाजपा नेत्री की मौजूदगी पर कांग्रेस के तीखे सवाल..
हरिद्वार। अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के दौरान उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब एसआईटी द्वारा उर्मिला सनावर से की जा रही पूछताछ के दौरान एक भाजपा से जुड़ी नेत्री की मौजूदगी सामने आई। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े करते हुए जांच की निष्पक्षता पर संदेह जताया है। भाजपा नेत्री को ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबेसडर बताया जा रहा है, जिसको लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि एसआईटी की यह पूछताछ ऐसे वक्त हो रही थी, जब मामले से जुड़े कई अहम और संवेदनशील बिंदुओं की गहन जांच चल रही थी। इसी दौरान राजनीतिक पहचान रखने वाली महिला की मौजूदगी ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जांच के दौरान किसी भी राजनीतिक प्रभाव या हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
पुलिस का पक्ष आया सामने, लेकिन संदेह बरकरार....
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संबंधित महिला एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) से जुड़ी हैं और वह उर्मिला सनावर से पूछताछ के समय एनजीओ प्रतिनिधि के रूप में मौजूद थीं। पुलिस का दावा है कि उनकी मौजूदगी पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी और जांच प्रक्रिया में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं हुआ। हालांकि, इस दावे के बावजूद सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि संबंधित महिला की सार्वजनिक पहचान एनजीओ से अधिक भाजपा से जुड़ी हुई दिखाई देती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उनके भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई तस्वीरें और वीडियो पहले से मौजूद हैं। इसके अलावा वह भाजपा के कार्यक्रमों और मंचों पर सक्रिय रूप से भाग लेती रही हैं।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा.....
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला अत्यंत संवेदनशील है और जांच प्रक्रिया जारी है, तो राजनीतिक पृष्ठभूमि रखने वाली महिला की मौजूदगी किस हैसियत से रही। गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि यदि संबंधित महिला स्वयं को केवल एनजीओ प्रतिनिधि बताती हैं, तो उनकी राजनीतिक सक्रियता और भाजपा नेताओं के साथ नजदीकी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि वह इस पूरे मामले को निष्पक्ष जांच से जोड़कर देख रही है।
जांच की निष्पक्षता पर टिकी सबकी निगाहें....
गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड पहले ही प्रदेश की राजनीति और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर चुका है। ऐसे में जांच से जुड़ा हर घटनाक्रम जनता की निगाहों में है। फिलहाल पुलिस या एसआईटी की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।


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